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भारत की स्त्रीयों का जातिसंहार रोकने के लिये याचिका

Translated from the original by Anil Ratnaparkhi

पिछ्ले ३ पिढीयों मे , कुल मिला के  ५ क़रोर  महिलाओं का अस्तित्व भारत की जनसंख्यासे मिटाया गया है । वोह भी सिर्फ इसलिए की वह एक औरत है ।

मनुष्य जाति के इतिहास मे यह एक सबसे बुरा हत्याकांड है , और ये चुपचाप चलता आ रहा है ।

“लड़कियों का गायब होना ” यह शिष्टोक्ति सर्वप्रथम  नोबेल पुरस्कृत डॉ अमर्त्य सेन ने की थी । १९८६ में उन्होंने भारत सरकार को इस उपलक्षमें चेतावनी दी थी । उनके अनुमान से भारत की जनगणना से ३.७ क़रोर लड़किया गायब हुई थी । तबसे लड़कियों को नष्ट करने की यह चाल बढ़ती ही जा रही है ।

भारत में महिलाओं को नष्ट करने के बहुत सारे तौर तरीके हैं । लड़कियों का गर्भपात, शिशुहत्या , उनका भूखों मरना , दहेजके लिए कत्ल , “आत्मसन्मान” के लिए  लड़कियों की हत्या और बारबार जबरदस्ती गर्भपात करवाने से महिलाओं की मृत्यु ।

लड़कियों की शिशुहत्या  – ये सामाजिक बुराई बहुत पहले से प्रचलित है । अभी भी भारत के गांवो में ये प्रथा चली आ रही है । शहरों मे बसे धनवान और शिक्षित लोग गर्भलिंग निदान करके, अगर लड़की है तो गर्भपात करवाते है । लेकिन गाँव बसे गरीब लोगों को इसके लिए पैसा खर्च करना मुमकिन नहीं है । नवजात शिशुको मरवाने के लिए  दाई को सिर्फ सौ रुपये काफ़ी होते है । कभी शिशु का गला दबाके मार दिया जाता है, तो कभी उसको जिन्दा गाड दिया जाता है । कभी बाल्टी में डूबा दिया जाता है, तो कभी जहर खिलाया जाता है । भारतके कुछ भागों मे यह  काम पिता या दादी से किया जाता है ।

भुखमरी और उपेक्षा – बहुत सारी लड़किया जो जनम लेती है और मरने से बच जाती है, वो उपवास और उपेक्षा के कारन भूखो मरती है ।   ५ वर्षसे कम उम्रकी लड़कियोंकी मरनेकी संभावना उसी उम्रके लड़कों से ४० प्रतिशत जादा है । इसकी वजह ये है कि  माँ -बाप उनके खाने-पिनेके लिए या दवा-पानीके लिए पैसा खर्च करना नहीं चाहते । लड़किया  क्या  करेगी  जिन्दा  रहके ? अगर वो मर  जाये तो अच्छा ही है ।

स्त्री भ्रूण हत्या – भारतमें यह एक अनियंत्रित समस्या है, खास तौरपर मध्यम और उच्चवर्गीय समाजमे । दरअसल डाक्टरी चिकित्सा के दरम्यान गर्भका लिंग बतलाना ये गैरकानूनी है । फिरभी लगभग १० लाख  लड़कियोंको चुनचुनके जनम लेनेसे पहलेही  मार दिया जाता है । इसी रफ्तारसे ये संख्या २० या ५० लाख  तक पहुँच सकती है ।

माता की मौत – बहुत बार गर्भ धारण करने से और अनचाहे गर्भ से छुटकारा पाने के लिए  लड़कियों का बारबार गर्भपात करने से , कभी कभी असुरक्षित अवस्था निर्माण हो जाती है । इस  हालात मे माता की मौत हो सकती है । यही वजह है की इस उपलक्षमे भारत सभी देशों से बुरी तरह से आगे है । अफ़सोस है की हर ५ मिनिटके बाद एक गर्भवती महिलाकी मृत्यु हो जाती है ।

दहेज की शिकार – माता पिता की और से ससुराल के लोगों की मांगे पूरी न होने से नवविवाहित लड़की की मृत्यु हो जाना यह एक आम बात बन गयी है । और ये सब लड़की का पति और उसके माता-पिता या उसके भाई-बहन इनकी संघटित करवाई से होता है । दुल्हन को जलाके ,  वो  रसोइघर में  काम करते समय उसी की गलती से जल गयी ऐसे दिखाया जाता है । अन्यथा उसे नींद की गोली खिलाकर मार दिया जाता है । कभी गलेमे फांस बांध के  कहते  है  की उसने आत्महत्या कर दी । कभी कभी इतना अत्याचार किया जाता है कि , उसे आत्महत्या करना यही एक पर्याय रह जाता है । हर साल करीब करीब २५,००० महिलांए इस तरह मृत्युमुखी पड़ती है । और उसमे से जो बच जाती है उन्हें अपंग बेसहारा जीवन जीना पड़ता है ।

संपूर्ण भारतभर ये हत्याकांड सभी स्तर में हो रहा है । अनपढ़ और पढ़े लिखे , गरीब, मध्यमवर्गीय और रईस  । शिक्षण , अर्थव्यवस्था, संस्कृति या धर्मं का महिलाओंकी हत्यासे कोईभी सम्बन्ध नहीं है । इसकी वजह है बड़े पैमाने पर मनमानी और कानून , सुव्यवस्था की बेपरवाही ।

अर्जी 

हम यहाँ दस्तखत करनेवाले लोग, भारत की जनसंख्या से  लाखों महिलाओं को गायब करनेवाली प्रणाली का तीव्र निषेध करते है । और भारत सरकारको उनकी जिंदगी न बचा सकने पर जिम्मेदार ठहराते है ।
मानवी हक की भूमिकासे हम लोग यह चाहते है की भारत सरकार  इस मामले पर तुरंत प्रभावशाली  कार्यवाही करे  और किसी जल्द कृति दल की  स्थापना करे । हम लोगों की यह भी मांग है की सरकार , महिलाओं का गर्भपात, स्त्री भ्रूण हत्या और  दहेज़ के लिए हत्या करनेवाले लोगों को  कैद करे । सभी अस्पताल , सरकारी और क़ानूनी यंत्रणा को इसके लिए  जिम्मेदार ठहराये और इस पूरी कार्यवाही की योजना को जारी  करे ।
हम लोग यह विनती करते है कि , सभी जागतिक मानवी हक्क संघटना और विभ्भिन देशोंकी शासन प्रणाली इस अभियान में शामिल हो जाये और भारत सरकारको इस अर्जीपर विचार करनेपर मजबूर करे ।

अर्जीपर दस्तखत करनेके लिए इस चित्र पर क्लिक करें  

 

  • ON CAUSES (VIA FACEBOOK)

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ABOUT THE TRANSLATOR:

Anil Ratnaparkhi is an Electronics Engineer, and after working in his own establishment for 15 years in India, is now settled in Canada. His favorite hobby is making short videos of different places he visits, and uploading them on UTube or Vimeo.

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2 Comments leave one →
  1. Amitabh permalink
    December 17, 2012 1:37 pm

    Beti se hi sab kuch hai . Agar beti nahi hogi to woh ek achi patni , banh , maa kaise ban payegi . Beti hi hamare desh ki shaan betiyo se gangha mazak mat kare unko achi edu ache sanskar de thaki woh apna aur apne desn ka naam roshan kar sake

  2. October 8, 2013 2:12 pm

    Ye sab angrezi aur videshi sanskar, achaar, vichaar in kaaranose horaha hai. Pehle har bharatiya ko hamare sanskaroke baare me samman karke unka paalan karna chahiye tab tak a samasya poorn tarahse nahi suljhega

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